जल जीवन मिशन की पाइपलाइन काटी या चोरी की तो होगी सीधे जेल

जल जीवन मिशन के फ्री कनेक्शनों का भी बिल आएगा

मप्र के गांवों में पेयजल व्यवस्था का पूरा ढांचा बदलने जा रहा है। नए कानून के तहत पानी की पाइपलाइन तोड़ने, वॉल्व क्षतिग्रस्त करने या टंकी पर कब्जा कर पानी चोरी करने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी।

सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण नलजल योजनाओं के लिए 2020 के नियमों की जगह यह नया कानून लागू किया है। नायकका कराहत मुफ्त पानी की

व्यवस्था खत्म होगी और जल जीवन मिशन में पहले दिए गए फ्री नल कनेक्शनों पर भी जन सहयोग राशि वसूली जाएगी।

जलापूर्ति व्यवस्था को ‘कॉर्पोरेट और कमर्शियल’ मॉडल पर संचालित किया जाएगा। यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि जल जीवन मिशन के तहत टंकियां और पाइपलाइन बनने के बाद कई गांवों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई थीं।

कई जगह सरपंच-सचिव नकद वाटर टैक्स वसूलकर जमा नहीं कर रहे थे। बिजली बिल नहीं भरने से पंप बंद हो जाते थे, जबकि प्रभावशाली लोगों को बड़े पाइप के अवैध कनेक्शन देकर पानी की चोरी कराई जा रही थी। इन्हीं गड़बड़ियों को रोकने के लिए पूरी व्यवस्था डिजिटल कर दी गई है।

 

सरपंच-सचिव ‘लोक सेवक’; गड़बड़ी की तो बर्खास्त होंगे

ग्रामीण नल-जल योजना से जुड़े सरपंच और पानी समिति का हर सदस्य बीएनएस, 2023 की धारा 2 (28) के तहत लोक सेवक माना जाएगा।

टैक्स वसूली में पक्षपात, चहेतों को अवैध कनेक्शन देने या फंड में हेराफेरी पर पद से बर्खास्त होंगे। गबन का केस दर्ज होगा।

 

टुल्लू पंप लगाया या पेयजल से वाहन धोया तो कार्रवाई

मुख्य लाइन पर टुल्लू पंप लगाकर पानी खींचने या पीने के पानी से वाहन धोने पर पहली बार 100 व दूसरी बार 500 जुर्माना लगेगा। कनेक्शन भी तत्काल कट जाएगा।

10 तारीख तक बिल नहीं भरा तो 5-10% पेनल्टी :

  • हर महीने 10 तारीख तक वाटर टैक्स जमा करना होगा। देरी पर 5 से 10% तक पेनल्टी लगेगी। लगातार तीन महीने भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन स्थायी रूप से कटेगा।
  • नकद लेन-देन पूरी तरह बंद। हर महीने ‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल पर ऑनलाइन बिल जारी होगा। उसी से भुगतान होगा। दूषित पानी की शिकायत मिलते ही ‘जल रेखा’ एप के जरिए जलापूर्ति रोकी जा सकेगी।

 

पुराने फ्री कनेक्शन के लिए जन सहयोग राशि लगेगी

जिन गांवों में जल जीवन मिशन के तहत पहले मुफ्त कनेक्शन दिए जा चुके हैं, उनसे भी यह राशि किश्तों में अनिवार्य रूप से वसूली जाएगी।

  • एससी/एसटी परिवार                1000
  • सामान्य ग्रामीण परिवार             2500
  • शासकीय संस्थाएं                     5000
  • व्यावसायिक संस्थान                 8000
  • औद्योगिक इकाइयां                  10000
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